ऐसे करते थे शिकार
गिरफ्तार अभियुक्त खुद को क्राइम ब्रांच या साइबर सेल का अधिकारी बताकर पीड़ितों को कॉल करते थे। फिर उन्हें बताते थे कि उनके मोबाइल नंबर या डिवाइस से किसी अश्लील वेबसाइट पर वीडियो देखा गया है, जो एक गंभीर अपराध है। इसके बाद आरोपी उन्हें IPC की धाराएं और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर समझौते के नाम पर मोटी रकम वसूलते थे।
पुलिस ने क्या बरामद किया?
पुलिस टीम ने गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों के पास से बड़ी संख्या में सिम कार्ड, फर्जी बैंक खाते, फिनो बैंक की डिवाइसेज़, नकदी, मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य तकनीकी उपकरण बरामद किए हैं, जिन्हें ये ठगी में इस्तेमाल करते थे। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे विभिन्न राज्यों में इस तरह की ठगी कर चुके हैं और कई फर्जी पहचान पत्रों का भी उपयोग करते थे।
गिरोह का नेटवर्क
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि यह गैंग एक संगठित नेटवर्क के तहत काम करता था, जिसमें अलग-अलग सदस्य कॉल करने, बैंक खातों की व्यवस्था करने और पैसे निकालने का काम करते थे। ये लोग कमजोर मानसिकता वाले लोगों को टारगेट करते थे, जो बदनामी के डर से शिकायत दर्ज नहीं कराते थे।
पुलिस का बयान
कानपुर साइबर सेल के प्रभारी ने बताया कि "हमारी टीम को कई दिनों से इस गिरोह की गतिविधियों पर नजर थी। तकनीकी सर्विलांस और गोपनीय सूचनाओं के आधार पर इन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। आगे की पूछताछ जारी है और इनके नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।"
जनता से अपील
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे इस तरह की कॉल या धमकी मिलने पर डरें नहीं, बल्कि तत्काल साइबर सेल या पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही, किसी अनजान लिंक पर क्लिक करने या निजी जानकारी साझा करने से बचें।
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