देश भर में सरकार बनाम किसान नामक आंदोलन छिड़ चुका है. ऐसे में दोनों पक्षों ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया गया है. भारत बंद के आह्वान का समर्थन कर रहे लोगों को उनके आंदोलन से पहले ही जिला प्रशासन ने घरों में ही रोक लिया. इसकी वजह से शहर में बंदी का असर नजर नहीं आ रहा. सुबह से ही सभी बाजार सामान्य रूप से खुले. थोक बाजार जरूर देर से खुलते हैं लेकिन मोहल्लों और गलियों में दुकानें सुबह से ही खुल गईं. दूसरी ओर नौबस्ता गल्ला मंडी में जहां आढ़तियों ने कारोबार बंद रखा हुआ है, वहीं गड़रियनपुरवा में आटो मार्केट के कारोबारियों ने भी दुकानें नहीं खोली हैं. नयागंज किराना बाजार ने बंदी की घोषणा की है लेकिन मात्र दोपहर एक बजे तक. इन व्यापार मंडलों को छोड़ बाकी ने दुकानें खोलने की बात सात दिसंबर को ही कह दी थी.
इन लोगों की हुई गिरफ्तारी
बड़ी संख्या में सपा के कार्यकर्ताओं को पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन लाया गया है. जिसमें विधायक अमिताभ बाजपेयी, इरफान सोलंकी, नगर अध्यक्ष डॉक्टर इमरान के अलावा सम्राट विकास यादव, अकील शानु, फिरोज खान, रियाज, बबलू मोहम्मद, मेराज और शाहरुख खान शामिल हैं. बता दें कि अमिताभ बाजपेई के घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल मौजूद होने के कारण उन्हें काफी देर तक झड़प करनी पड़ी. इसके बाद उनको गिरफ्तार करके पुलिस लाइन ले जाया गया.
इन क्षेत्राें में पूर्व की भांति खुल गईं दुकानें
सुबह से ही बर्रा, किदवई नगर, नौबस्ता, कर्रही, कौशलपुरी, गुमटी, अशोक नगर, नवाबगंज, चकेरी, श्याम नगर, पनकी, कल्याणपुर आदि क्षेत्र के मोहल्लों में दुकानें खुल गई थीं. नवीन मार्केट में सबसे पहले राजनीतिक दलों द्वारा बंदी का प्रयास किया जाता है, इसलिए वहां व्यापारियों ने थोड़ा इंतजार के बाद दुकानें खोलनी शुरू कीं. शहर में बवाल ज्यादा न बढ़े इसलिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात था. पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों को बेहद सहजता से समझााया गया. एसीएम और सीओ को सक्रिय रहने के निर्देश पहले से थे कि कहीं भी कोई जबरन बंदी न कराए.
बड़े-बड़े व्यापारी नेताओं ने झाड़ लिया पल्ला
फीट के महामंत्री उमंग अग्रवाल ने भी अपने संगठन की सभी व्यापारिक और औद्योगिक इकाइयों के खुले रहने की घोषणा की थी. कैट के राष्ट्रीय सचिव और कानपुर सराफा एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने भी बंदी का विरोध किया था. केमिकल एंड डाइज एसोसिएशन के प्रदेश महामंत्री आरके सफ्फड़ ने भी बाजार खुले रहने की घोषणा की थी. नौघड़ा कपड़ा कमेटी के अध्यक्ष शेष नारायण त्रिवेदी ने किसानों के आंदोलन का तो समर्थन किया है लेकिन दुकानें खोलने की बात कही थी. कुछ एेसी ही स्थिति कंछल गुट के व्यापार मंडल की थी जिसने किसानों के आंदोलन का तो समर्थन किया है लेकिन बंद से तटस्थ रहने की बात कही है.

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